Wednesday, 17 December 2014

यादें

हम दूर उनसे नहीं भागते...
हम भागते हैं उन यादों से, जिनकी शक्लो-सूरत उनसे मिलती है!

वो पहली मुलाक़ात, जो ख़ुदा की मर्ज़ी से हुई…
फिर वो सिलसिला, जो शुरू हुआ ख़ुद की मर्ज़ी से!

वो चेहरा, जो दवा हुआ करता हमारे हर एक दर्द की...
वो हंसी, जो मरहम हुआ करती दिल के हर एक ज़ख्म का...
वो आवाज़, जो इलाज हुआ करती हमारे हर एक मर्ज़ का...
वो अल्फाज़, जो ताक़त हुआ करते हमारे टूटते बिखरते हौसले की…
वो अंदाज़, जो वजह हुआ करते हमारे चैनोसुकूँ की…
छुपते हैं अब हम उन तमाम यादों से, जिन में शामिल ये सभी हैं!

वो सुबहें सभी जो थी कभी रोशन उन्ही से...
वो शामें भी जो थामे रहतीं हाथ उन्ही का.…
वो रातें, जो ओढ़ कर आतीं उन्हीं के ज़ुल्फ़ के साये...
वो हर एक पल जो था कभी गुलशन उन्ही से...
वो सभी लम्हे जिन पे हक़ था सिर्फ उन का
बचते हैं अब हम उन तमाम यादों से, जिन में शामिल ये सभी हैं !

वो सपने,जो देखे हक़ीक़त से अंजान रहकर
वो क़समें, जो खाईं नादान जज्बातों में बहकर
वो वादे, किये जो कभी बिना सोचे बिना समझे
वो इरादे, रखे जो कभी बिना जाने बिना बूझे
वो सारी खुशियां ख़ुद की जो उन पे लुटा दी...
वो सारे आँसू उनके जो इन आँखों से बहे
वो सारे लफ्ज़ जो उनके लिए कहे
जो उनसे सुने, अपने लिए!
डरते हैं अब हम उन तमाम यादों से, जिन में शामिल ये सभी हैं !

यादें... जिन में सब कुछ उन्ही का
अक्स भी... शक्ल भी... आवाज़ भी... अंदाज़ भी...
और हाँ, हम भी !

आख़िर ये यादें ही तो हैं जो हर दम याद दिलाती हैं…
की कभी इंसान हुआ करते थे हम!
डर लगता है अब इंसान बनने से!

Sunday, 16 November 2014

नज़्म जूठी


मेरी नज़्म …
जो आई तुम्हारे लबों पे आज सुबह

सोचा चख लूँ ख़ुद
रात की फुरसत में...


कहते हैं …
जूठे से प्यार बढ़ता है !

Monday, 8 September 2014

सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
आरम्भ भी और मध्य भी
निश्चित बना वो अंत भी!
अनादि वो अनंत भी
अपार वो अखंड भी
असीम अमित कृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
ये जीव भी निर्जीव भी
ये दृश्य भी अदृश्य भी
ये स्थूल भी और सूक्ष्म भी
प्रत्यक्ष भी व परोक्ष भी
कण कण में केवल कृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं !


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
मेरे तन में भी, मेरे मन में भी
भजनों में भी, चिंतन में भी
मेरे ध्यान में, अर्चन में भी
जप तप में वो सेवा में भी
क्षण क्षण में केवल कृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
संसार? माया कृष्ण की !
अज्ञेय है लीला सभी
मैं मैं नहीं, तुम तुम नहीं
भ्रम है अहम् ,सच्चा नहीं
इस सत्य को पहचान लो
केवल यहाँ श्रीकृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं !

Saturday, 30 November 2013

आख़री अश्क़

ये कुछ आख़री अश्क़ बचे थे
आँखों में
उनके लिए
लो आज बह गए !
अब और रोया
तो ख़ून ही निकलेगा!

Tuesday, 23 July 2013

पलकों के तले

ख़्वाबों को हक़ीक़त का जामा हर बार नहीं पहनाया जाता
कुछ ख़्वाब सिर्फ पलकों के तले महफूज़ रहते हैं
पलकें खुली नहीं की पिघल गए हमेशा के लिए
एक ऐसा ही ख़्वाब मैंने सम्भाले रखा है पलकों के तले
एक ऐसा ख़्वाब
जिसमे चैनोसुकून है, खुशियाँ हैं
जो कुछ भी है उस पर हक़ सिर्फ़ मेरा है
दुनिया के रीतिरिवाजों से परे एक अलग ही बसेरा है



दुनियावालों,
सोने दो मुझे
बंद रहने दो इन पलकों को
ऐ रात, तू न ढल
ऐ सूरज, मत निकल
समय, तू थम जा जरा
मुझे इस नींद से न जगा



सुबह होते ही उठना पड़ेगा
और पलकों के खुलते ही ये ख़्वाब
झुलस जाएगा सच्चाई की लपटों में
एक ऐसा ख़्वाब
जिसमे चैनोसुकून है, खुशियाँ हैं
जो कुछ भी है उस पर हक़ सिर्फ़ मेरा है
सिर्फ़ मेरा!

बस यूँही