Monday, 8 September 2014

सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
आरम्भ भी और मध्य भी
निश्चित बना वो अंत भी!
अनादि वो अनंत भी
अपार वो अखंड भी
असीम अमित कृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
ये जीव भी निर्जीव भी
ये दृश्य भी अदृश्य भी
ये स्थूल भी और सूक्ष्म भी
प्रत्यक्ष भी व परोक्ष भी
कण कण में केवल कृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं !


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
मेरे तन में भी, मेरे मन में भी
भजनों में भी, चिंतन में भी
मेरे ध्यान में, अर्चन में भी
जप तप में वो सेवा में भी
क्षण क्षण में केवल कृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं


सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं
संसार? माया कृष्ण की !
अज्ञेय है लीला सभी
मैं मैं नहीं, तुम तुम नहीं
भ्रम है अहम् ,सच्चा नहीं
इस सत्य को पहचान लो
केवल यहाँ श्रीकृष्ण हैं !
सब कुछ यहाँ श्रीकृष्ण हैं !