शब्दोंसे परे भावोंसे भरे
Friday, 5 February 2016
नज़राना
तुम्हें देने के लिए चाँद-तारे तो नहीं मेरे पास। ...
चंद मेरी ये नज़्में हैं, चाहो तो नज़र कर दूँ ?
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