Tuesday, 18 September 2012

प्रभु एक निवेदन है तुझसे

प्रभु एक निवेदन है तुझसे
इतनी भी न दे ऊँचाई मुझे
झुककर नीचे देखूं जो कभी
मेरा अपनासा कोई न दिखे !

प्रभु एक निवेदन है तुझसे
इतनी भी न दे  रफ़्तार मुझे
मुड़कर पीछे देखूं जो कभी
अपना न कोई मेरे संग दिखे !

प्रभु एक निवेदन है तुझसे
इतनी भी न दे  गहराई मुझे
डूबा ही रहूँ खुद में इतना
कोई और न मुझतक पहुँच सके !