शब्दोंसे परे भावोंसे भरे
Monday, 11 July 2011
छूना नहीं
कभी ग़लती से भी छूना नहीं नज्मों को मेरी |
इन्हें बस दूर से देखो; नहीं तो जल ही जाओगे!
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बस यूँही
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देखा है मैंने साथी बादलों से घिरे चाँद को चोरी से मेरी तरफ देख मुस्कुराते हुए ! हाँ; देखा है मैंने | और ये जानने के बाद की मैं भ...
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