शब्दोंसे परे भावोंसे भरे
Saturday, 28 July 2012
जुदाई
आज जुदा हो रहे हैं...
उस लम्बी जुदाई से पहले!
कहते हैं:
अपना एहसास दिलाती है
मौत
आने से पहले!
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बस यूँही
देखा है मैंने
देखा है मैंने साथी बादलों से घिरे चाँद को चोरी से मेरी तरफ देख मुस्कुराते हुए ! हाँ; देखा है मैंने | और ये जानने के बाद की मैं भ...
पलकों के तले
ख़्वाबों को हक़ीक़त का जामा हर बार नहीं पहनाया जाता कुछ ख़्वाब सिर्फ पलकों के तले महफूज़ रहते हैं पलकें खुली नहीं की पिघल गए हमेशा के लि...
काफ़िर ही सही
बैठा था चिंतन में डूबा नदिया के तट पे अकेला हाँ... अकेला ही शायद! तभी अचानक नजरें उठीं ऊपर उस अनादि अनंत आसमान में देख गगन में होती अविरत...